Sunday, December 21, 2025

कटे हाथ नहीं जुड़ते

जब अपना ही हाथ देने लगा दर्द ,

बन कर नासूर ,

हमने अपना ही हाथ काट दिया ज़नाब ,

हाथ कटने का दर्द और  मलाल तो होता है ,

पर टूटी हुई माला , टूटे हुए ख़्वाब , और 

कटे हाथ नहीं जुड़ते।  

,

Friday, December 19, 2025

चुपके - चुपके, आँसू बहाना

 ऐसा नहीं, कि कभी ,

मेरी आँख से आँसू न टपका हो ,

ये और बात है -

लोग महसूस नहीं करते ,

और ,

ऐसा भी नहीं , कि ,

मैं कोई अकेला ही हूँ 

इस जहान में ,

आप भी हैं - और आप भी ,

ये भी हैं और वो भी हैं, 

बस सभी के चेहरे पर 

मुखौटे हैं...... 

सच कह ,  तो बताना ,

और , 

चुपके - चुपके,आँसू बहाना  ..... 

नहीं, नहीं , 

मेरा मतलब , आपका दिल 

दुखाने का नहीं है ,

पर , जो सत्य है ,

वही तो कहा है मैंने  ....... 

Sunday, November 30, 2025

रहे आबाद ये चमन

इस देश की अमनो -तहज़ीब बचाये हुए रखिये ,
गंगो -जमुन की रवायत को जिन्दा रखिये ,
यूं न नफ़रत का जहर लोगों में बाँटिये ,
इन्सानियत को दिल में बसाये हुए रखिये।

नफ़रत से तो नफ़रत की ही आग बढ़ेगी ,
नफ़रत से नहीं हल किसी भी बात की होगी ,
श्रृंगारमय  शब्दों से लफ़्जों को निखारिये ,
आँखों में अपने प्यार का दीपक तो बालिये।

हम फूल हैं , विविध रंगों के , इस प्यारे चमन का ,
फूलों की खुशबू को बचाये हुए रखिये ,
कोई फूल न कुम्हलाये मेरे प्यारे चमन का ,
मन में अपने आज यही ठान लीजिये।
 
भटके हैं जो राह से , उन्हें रहें दिखाइये ,
प्यार की ऐसी ही , इक गंगा बहाइये ,
हर ओर हो खुशियां , रहे आबाद ये चमन ,
प्यार भरे दिल से ये पैगाम दीजिये। 
-- विजय कुमार सिन्हा ," तरुण "


 

Monday, July 14, 2025

एक सच यह भी

राज की बात किसी से ना कहना ,
औरों के दिल की छोड़ ,
अपने दिल की किताब पढ़ना ,
होंगे ,
बहुत किस्से ,
कहीं उदासी के , कहीं ग़म ,
कहीं तन्हाई के ,
मगर ,  उन्हीं में से ,
एक पन्ना , ख़ुशी के भी होंगे। 

ये मत कहना -
ज़माने ने क्या दिया मुझको !,
बिखरे पड़े हैं ,
अनगिनत , मोती, हीरे - जवाहरात ,
अनगिनत कंकड़ - पत्थर ,
हर जगह ,
यह तुम जानो ,
तुम क्या चुनते हो  ......... 
               -- विजय 

शब्दों के जंगल से

1.  जब भी मिला करो ,
     मुस्कुरा कर मिला करो ,
     न जाने कौन सा पल ,
      जिंदगी का आखिरी पल हो।
                            ----- विजय 

2.  वो बहुत मुस्कुराते हैं ,
      ना जाने कौन सा दर्द छुपाते हैं ! 
                                        ---विजय 

3.   अक्सर , वो बहुत उदास रहते हैं ,
      ना जाने , किस गम में डूबे रहते हैं !   
                                           -----विजय 

4.    प्रेम में जीतना कैसा !
       जीत तो वहाँ है ,
        जहां प्रेम नहीं है ,
        जहाँ प्रेम है ,
        वहाँ , हारना ही जीत है।   
                                --- विजय 

5.     बुढ़ापा , जीना सिखा देता है ,
         क्योकि ,
       वह सहना सिखा देता है।   
                                     विजय ------

6.      मौसम , खराब है , घर में बैठिये ,
        आंधी के आसार हैं , छप्पर बचाइए।
        आंधी भी फ़ना होगी , आफ़त भी छँटेगी ,
         होगा साफ आसमां , धरती भी हँसेगी ,
         हर कोर - कोर , पोर - पोर ,
         दीवाली  मनेगी।   
                                 --विजय