जब अपना ही हाथ देने लगा दर्द ,
बन कर नासूर ,
हमने अपना ही हाथ काट दिया ज़नाब ,
हाथ कटने का दर्द और मलाल तो होता है ,
पर टूटी हुई माला , टूटे हुए ख़्वाब , और
कटे हाथ नहीं जुड़ते।
,
जब अपना ही हाथ देने लगा दर्द ,
बन कर नासूर ,
हमने अपना ही हाथ काट दिया ज़नाब ,
हाथ कटने का दर्द और मलाल तो होता है ,
पर टूटी हुई माला , टूटे हुए ख़्वाब , और
कटे हाथ नहीं जुड़ते।
,
ऐसा नहीं, कि कभी ,
मेरी आँख से आँसू न टपका हो ,
ये और बात है -
लोग महसूस नहीं करते ,
और ,
ऐसा भी नहीं , कि ,
मैं कोई अकेला ही हूँ
इस जहान में ,
आप भी हैं - और आप भी ,
ये भी हैं और वो भी हैं,
बस सभी के चेहरे पर
मुखौटे हैं......
सच कह , तो बताना ,
और ,
चुपके - चुपके,आँसू बहाना .....
नहीं, नहीं ,
मेरा मतलब , आपका दिल
दुखाने का नहीं है ,
पर , जो सत्य है ,
वही तो कहा है मैंने .......
राज की बात किसी से ना कहना ,
औरों के दिल की छोड़ ,
अपने दिल की किताब पढ़ना ,
होंगे ,
बहुत किस्से ,
कहीं उदासी के , कहीं ग़म ,
कहीं तन्हाई के ,
मगर , उन्हीं में से ,
एक पन्ना , ख़ुशी के भी होंगे।
ये मत कहना -
ज़माने ने क्या दिया मुझको !,
बिखरे पड़े हैं ,
अनगिनत , मोती, हीरे - जवाहरात ,
अनगिनत कंकड़ - पत्थर ,
हर जगह ,
यह तुम जानो ,
तुम क्या चुनते हो .........
-- विजय
1. जब भी मिला करो ,
मुस्कुरा कर मिला करो ,
न जाने कौन सा पल ,
जिंदगी का आखिरी पल हो।
----- विजय
2. वो बहुत मुस्कुराते हैं ,
ना जाने कौन सा दर्द छुपाते हैं !
---विजय
3. अक्सर , वो बहुत उदास रहते हैं ,
ना जाने , किस गम में डूबे रहते हैं !
-----विजय
4. प्रेम में जीतना कैसा !
जीत तो वहाँ है ,
जहां प्रेम नहीं है ,
जहाँ प्रेम है ,
वहाँ , हारना ही जीत है।
--- विजय
5. बुढ़ापा , जीना सिखा देता है ,
क्योकि ,
वह सहना सिखा देता है।
विजय ------
6. मौसम , खराब है , घर में बैठिये ,
आंधी के आसार हैं , छप्पर बचाइए।
आंधी भी फ़ना होगी , आफ़त भी छँटेगी ,
होगा साफ आसमां , धरती भी हँसेगी ,
हर कोर - कोर , पोर - पोर ,
दीवाली मनेगी।
--विजय