इस देश की अमनो -तहज़ीब बचाये हुए रखिये ,
गंगो -जमुन की रवायत को जिन्दा रखिये ,
यूं न नफ़रत का जहर लोगों में बाँटिये ,
इन्सानियत को दिल में बसाये हुए रखिये।
नफ़रत से तो नफ़रत की ही आग बढ़ेगी ,
नफ़रत से नहीं हल किसी भी बात की होगी ,
श्रृंगारमय शब्दों से लफ़्जों को निखारिये ,
आँखों में अपने प्यार का दीपक तो बालिये।
हम फूल हैं , विविध रंगों के , इस प्यारे चमन का ,
फूलों की खुशबू को बचाये हुए रखिये ,
कोई फूल न कुम्हलाये मेरे प्यारे चमन का ,
मन में अपने आज यही ठान लीजिये।
गंगो -जमुन की रवायत को जिन्दा रखिये ,
यूं न नफ़रत का जहर लोगों में बाँटिये ,
इन्सानियत को दिल में बसाये हुए रखिये।
नफ़रत से तो नफ़रत की ही आग बढ़ेगी ,
नफ़रत से नहीं हल किसी भी बात की होगी ,
श्रृंगारमय शब्दों से लफ़्जों को निखारिये ,
आँखों में अपने प्यार का दीपक तो बालिये।
हम फूल हैं , विविध रंगों के , इस प्यारे चमन का ,
फूलों की खुशबू को बचाये हुए रखिये ,
कोई फूल न कुम्हलाये मेरे प्यारे चमन का ,
मन में अपने आज यही ठान लीजिये।
भटके हैं जो राह से , उन्हें रहें दिखाइये ,
प्यार की ऐसी ही , इक गंगा बहाइये ,
हर ओर हो खुशियां , रहे आबाद ये चमन ,
प्यार भरे दिल से ये पैगाम दीजिये।
प्यार की ऐसी ही , इक गंगा बहाइये ,
हर ओर हो खुशियां , रहे आबाद ये चमन ,
प्यार भरे दिल से ये पैगाम दीजिये।
-- विजय कुमार सिन्हा ," तरुण "
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