Sunday, July 26, 2026

कुछ हट कर

 कुछ हट कर 

1 लाख दुश्मनी रखो , नफरत रखो ,
   पर दिल के एक कोने  में ,
  थोड़ी सी जगह रखो , कि
  जब कभी वक़्त पड़े ,
  दुश्मन तुम्हारे घर आये ,
  और ,
  तुम दुश्मन के घर जाओ ,
  एक दूजे के फ़रिश्ते बन कर। 

2. अपनों ने दर्द दिए इतने , कि
    अब दर्द नहीं होता
    अब किसी से नुहब्बत का ,
     इज़हार नहीं होता ,
     औरों को हंसाने में ,
     मैं इतना रोया , कि
     अब , आँखों में।
     अश्क का कोई कतरा नहीं होता। 

3. लाख दर्द हो दिल में ,
     लब पर , नहीं आता ,
      मुस्कुराने की आदत है मेरी ,
      इसलिए मुस्कुराता हूँ ,
      जानता हूँ -
      कुछ देर ही सही ,
      दिवस का अवसान होने वाला है ,
      शाम होने वाली है ,
      स्याह रात भी आएगी ,
       गुज़र जायेगी ,
       सवेरा रोज आता है   .........













































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