कुछ हट कर
1 लाख दुश्मनी रखो , नफरत रखो ,
पर दिल के एक कोने में ,
थोड़ी सी जगह रखो , कि
जब कभी वक़्त पड़े ,
दुश्मन तुम्हारे घर आये ,
और ,
तुम दुश्मन के घर जाओ ,
एक दूजे के फ़रिश्ते बन कर।
2. अपनों ने दर्द दिए इतने , कि
अब दर्द नहीं होता
अब किसी से नुहब्बत का ,
इज़हार नहीं होता ,
औरों को हंसाने में ,
मैं इतना रोया , कि
अब , आँखों में।
अश्क का कोई कतरा नहीं होता।
3. लाख दर्द हो दिल में ,
लब पर , नहीं आता ,
मुस्कुराने की आदत है मेरी ,
इसलिए मुस्कुराता हूँ ,
जानता हूँ -
कुछ देर ही सही ,
दिवस का अवसान होने वाला है ,
शाम होने वाली है ,
स्याह रात भी आएगी ,
गुज़र जायेगी ,
सवेरा रोज आता है .........
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