Thursday, August 27, 2020

( 1 ) साजिस और ( 2 ) मेरा मन

( 1  )      साजिस
बूढ़े बरगद और पीपल के पेड़
यूँ ही धरासायी नहीं हुए होंगे ,
जरूर आसमां के                
नक्षत्रों ने मसविरा किया होगा ,
रचे होंगे साजिस ,
वरना आँधियों की क्या बिसात।

( 2  )  मेरा मन
मन ,मन भर का भारी हो गया ,
मेरा मन ,
मन ही मन में मेरे मन से ,
दूर हो गया मेरा मन ,
मन की मन से बात हुई थी ,
मन ही मन ,
मन की मन की बात रह गई ,
मन ही मन ,
मन ही मन में हुआ उदास ,
यह मेरा मन।
 मन कुछ कहता , मन कुछ सुनता ,
सुन कर भी अनसुनी करता ,
मन ही मन में मन सोचता ,
कैसा है यह मेरा मन ?

Tuesday, August 4, 2020

रेशम का दुपट्टा

बारिस का है मौसम,
यूँ निकला ना करो ,
ज़माना है खराब ,
जमाने से डरो।
मौसम का क्या भरोसा ,
कभी ये भी मचल जायेगा ,
झूम कर नाचेगा ,
बहक जायेगा।
भींगा ना करो तुम कभी बूंदों में ,
 रेशम का दुपट्टा है लिपट जायेगा।
जुल्फों से टपकता हुआ ,
बरसात का पानी ,
चूमेगा तन - वदन ,
वो बन के शराबी।
नाजुक तेरा बदन है ,
लग जायेगी नजर ,
निकली हो तुम बरसात में ,
सब को है ये खबर।
रहना ना इत्मीनान ,
अपनों से भी कभी ,
देते हैं बड़ा ज़ख्म ,
अपने भी हैं कभी।